व्यंग्य - जब तक खुदा सलामत चाचा
व्यंग्य ग़ज़ल जब तक खुदा सलामत चाचा इंसानों की आफत चाचा मुल्ला मरे पादरी मरता मरता ग्रंथी पंडित चाचा पाँचों वक्त नमाजें पूजन फ़िर भी नहीं हिफाज़त चाचावे भी ज़र ज़मीन मालिक जो रब से रखें अदावत चाचा जो रहता ख़ुद डरा छुपा सा भेजो उसको लानत चाचा सहते सहते उमर...
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वीरेन्द्र जैन
व्यंग्य्ज़ल
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[18 Sep 2009 01:26 AM]



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