व्यंग्य - जब तक खुदा सलामत चाचा

virendra jain ke nashtar व्यंग्य ग़ज़ल जब तक खुदा सलामत चाचा इंसानों की आफत चाचा मुल्ला मरे पादरी मरता मरता ग्रंथी पंडित चाचा पाँचों वक्त नमाजें पूजन फ़िर भी नहीं हिफाज़त चाचावे भी ज़र ज़मीन मालिक जो रब से रखें अदावत चाचा जो रहता ख़ुद डरा छुपा सा भेजो उसको लानत चाचा सहते सहते उमर... [पूरी पोस्ट]
writer वीरेन्द्र जैन

व्यंग्य्ज़ल

views
10
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[18 Sep 2009 01:26 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix