व्यंग्जल - तिरी बिगडी बना देगी
मुहब्बत का मसाला डाल कर कुछ भी बना देगीतुम्हें रबड़ी लगेगी वो अगर खिचड़ी बना देगीभजन में गीत है संगीत है, आनन्द ले लेनासमझना मत कि वो देवी तिरी बिगड़ी बना देगीसियासत आदमी की जात को बचने नहीं देगीकभी अगड़ी बना देगी, कभी पिछड़ी बना देगीइधर मँहगाई ने मारा उधर...
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वीरेन्द्र जैन
व्यंग्य
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[23 Sep 2009 01:31 AM]



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