एक गीत :हर बार समर्पण करता हूँ...
एक गीत :हर बार समर्पण करता हूँ...हर बार समर्पण करता हूँ हर बार गया ठुकराया हूँ अधखुली उनींदी पलकों पर इक मधुर मिलन की आस रही दो अधरों पर तिरते सपने चिर अन्तर्मन की प्यास रहीहर बार याचना सावन की हर बार अवर्षण पाया हूँ तेरे घर आने की चाहत गिरता हूँ कभी...
[पूरी पोस्ट]
आनन्द पाठक
गीत
8
0
0
0
0
[01 Aug 2009 01:44 AM]



Shuffle








