ठहर-सा गया है कोलकाता

पुरवाई किसी जमाने में राजीव गांधी ने कलकत्ता को मरता हुआ शहर कहा था। तब उनकी इस टिप्पणी पर भद्रलोक कहे जाने वाले इस समाज ने काफी बवाल किया था। तब मरता हुआ था या नहीं, यह मुझे नहीं पता। मैं तब इस महानगर में आया ही नहीं था। लेकिन अब पंद्रह साल पुराने वाहनों को... [पूरी पोस्ट]
writer प्रभाकर मणि तिवारी

कोलकाता

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[10 Aug 2009 04:22 AM]

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