उलझे से रिश्ते

थोड़ी सी ज़मीन, थोड़ा सा आसमान क्यूं सब कुछ सही चलते चलते अचानक से रुक जाता है क्यूं मन की उलझने कभी ख़त्म नही होती. अपने ही नही बल्कि अपने आस पास के लोगों को देखूं तो भी लगता है क्यूं कुछ रिश्ते हम सारी उमर निभाने के लिए अभि-शिप्त होते हैं क्यूं हम चाहकर भी उस बंधनो को तोड़ नही पाते... [पूरी पोस्ट]
writer Surbhi
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[22 Aug 2009 10:16 AM]

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