सफ़र
उस आने वाली बारिश की बूंदो नेहवा को, श्रंगार का अहसास कराया।घर की कुछ यादों का,दोस्तों की चटपटी बातों का,और मां के दुलार का,मन को बहुत कुछ याद आया,उस सफ़र में।छुक-छुक दौड़ रही थी गाड़ीमेरे घर की ओर। खेतों को सहलाती पवन,खेल रही थी,खेल कुछ और।काली घटाओं...
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anupam mishra
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[04 Aug 2009 03:47 AM]



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