ख़त फ़िर मेरे हाथ में है --

TRUTH (Collection of my poems) एक ख़त जो लिखा था मैंने तुम्हे कभीवो ख़त आज फिरमेरे हाथ में हैख़त लिखकरछा गया था दिलो-दिमाग पर बेइंतिहा सुरूरशायद मन में था कहीं न कहींतुम्हे ख़त लिखने पर गुरूरमुझे याद है उस दिनख़त लिखकर ख़त को अनायास मैंनेचूम लिया थाइतना हल्का हो गया था किख़ुद का भी... [पूरी पोस्ट]
writer M VERMA

कविता

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[26 Jul 2009 09:12 AM]

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