चलो अब इसमें संस्कार बोऊँ !!

TRUTH (Collection of my poems) ~~~~~~~वह असंस्कारित थामैने उसे संस्कार देना चाहामैंने उसे जिन्दगी कासार देना चाहामैने कहा बोलो 'प्रणाम'वह फुसफुसायाअपनी जुबान हिलायाऔर बोला 'रोटी'मैं समझ गया किवह भूखा हैमैने उसे रोटी खिलाईठंडा पानी पिलाया वह शातिर था -वह अपनी भूख को भुना रहा था वह अब... [पूरी पोस्ट]
writer M VERMA

अनुभूति

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[19 Aug 2009 20:21 PM]

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