किसी के मरने की खबर नहीं है ~~
~~~गगन चूमने को आतुर थायह अधबना मकानसहसा धराशायी हो गयाआश्रय देने को आतुर थापलांश मे आततायी हो गयाहम भी तो आदी हैंढहन देखने कोहर बार हम बनाते हैंएक नई लंकालंकादहन देखने कोहमारी आँखें तलाशती हैंबिखरी हुई रक्ताभ ईटेंमांस के लोथड़े और रक्त की छीटेंआज के इस...
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M VERMA
कविता
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[21 Sep 2009 09:00 AM]



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