रावण फ़िर अस्तित्व ले रहा है ~~~

TRUTH (Collection of my poems) रावण अस्तित्व ले रहा हैहर रामलीला ग्राऊँड के बाहरन जाने कितने कारीगर लगाये गये हैंपिछले साल से बड़ा रावण बनाने के लियेकोई इसका हाथ बना रहा हैकोई धड़, कोई सिर तो कोई पैरकोई इसका जिस्म बना रहा हैकोई इसका तिलिस्म बना रहा हैअभी यह पड़ा रहेगापर एक दिन यह खड़ा हो... [पूरी पोस्ट]
writer M VERMA

कविता

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[24 Sep 2009 08:53 AM]

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