अब किसको क्या कहे ?

इक बात मेरे दिल की आपके दिल तक चीनी भी अब कसैलि होने लगी है. प्रभु के गुन भि अब बिना दाल खाये गाऐ जा रहे है . प्रभु ही तो इक सहारा बचा है. सरकार तो बस कार मै ही घुम रहि है. किराने कि दुकान से किनारा करने लगे है लोग . स्वाइन फ्लु क्यो नही फैलेगा - तरकारी सपना जो है . मानसून की मेहरबानी... [पूरी पोस्ट]
writer Main Hoon Na ....
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[29 Aug 2009 00:47 AM]

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