अच्‍छे नागरिक कभी भी नहीं करते प्रतिरोध — विजयबहादुर सिंह की कविता

बर्बरता के विरुद्ध 'चरणदास चोर' नाटक पर रोक लगने पर कुछेक लोगों के लिखने-बोलने के अलावा आमतौर पर चुप्‍पी छाई हुई है। लगता है अब तमाम प्रतिष्ठित प्रगतिशीलों के लिए हबीव के नाटक पर रोक लगने का विरोध करना भी दायरे से बाहर की चीज हो गया है। सांप्रदायिकता के विरोध पर बड़े-बड़े... [पूरी पोस्ट]
writer Kapil

vijaybahadur singh

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[13 Aug 2009 01:38 AM]

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