चाहिए न और पाखी हासिल अब जो पुरनमी है
बहरे रमल मुसमन मशकूल के बारे में गुरुदेव सुबीरजी के पिछली पोस्ट में जानकारी दी गयी थी.विचार आया कि कुछ अभ्यास किया जाए.फाएलातु फाएलातुन फाएलातु फाएलातुन(२१२१ २१२२ २१२१ २१२२)इस पर कोशिश करने लगा,फिर लगा कि क्षमता से बड़ा काम पकड़ लिया है...पर मर खप कर गजल...
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प्रकाश पाखी
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[10 Aug 2009 10:00 AM]



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