सच सच कहना आज कहाँ है... !
जिन गलियों में तुम और मैं कदम कदम पर साथ चले थेउन गलियो की उड़ती धूल मन में मीलो महक रही हैचौराहों पर घंटो घंटे बातों बातों बिता दिए थेमूंग फलियो के उन छिलकों में कुछ कुछ दाने मेरे भी थेमूवी में वो मीठी सीटी बजा बजा के मजे लिए थेआगे बैठी सुन्दर लड़की...
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प्रकाश पाखी
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[30 Aug 2009 06:34 AM]



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