प्रतियोगिता परीक्षा का भक्ति वेदान्त -अध्याय २

प्रकाश पाखी संजय उवाच करूणा से व्याप्त,शोकयुक्त अश्रुपूरित नेत्रों वाले अर्जुन को देखकर मधुसूदन कृष्ण ने ये वचन कहे।श्रीभगवानुवाच- हे अर्जुन!तुम्हारे मन में यह कल्मष कैसे आगया?यह उस पी सी एस एस्पैरेंट के तनिक भी अनुकूल नहीं है जो प्रतियोगिता का मूल्य पहचानता है.इससे... [पूरी पोस्ट]
writer प्रकाश पाखी
views
6
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[21 Sep 2009 11:21 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix