इस्मत जैदी की गजल

किस्सा-कहानी मैं जा रहा हूँ मेरा इंतज़ार मत करना ,और अपनी आंखों को भी अश्कबार मत करना ।ग़रीब दोस्त हूँ कर पाउँगा नहीं पूरी ,के ख्वाहिशें कभी तुम बेशुमार मत करना।ये जानता हूँ के तखरीब तेरी आदत है,हरे हैं खेत इन्हें रेगज़ार मत करना ।मुझे तो मेरे बुजुर्गों ने ये सिखाया... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना अवस्थी दुबे

ग़ज़ल

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[13 Aug 2009 06:33 AM]

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