ज्ञातव्य
"अरे वाह साहब! ऐसा कैसे हो सकता है भला!! इतनी रात तो आपको यहीं हो गई, और अब आप घर जाके खाना क्यों खायेंगे?"’देखिये शर्मा जी, खाना तो घर में बना ही होगा। फिर वो बरबाद होगा।’’लेकिन यहां भी तो खाना तैयार ही है। खाना तो अब आप यहीं खायेंगे।’पापा पुरोहित जी को...
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वन्दना अवस्थी दुबे
कहानी
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[26 Sep 2009 13:46 PM]



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