स्मृति के झरोखों से: कारगिल विजय दिवस
आज ही का दिन तो था, जब सारा देश जीत की खुशी से ज्यादा अपने सपूतों को खोने के ग़म में डूबा हुआ था। यकीन ही नहीं आता कि उस बात को बीते एक दशक हो चुका है, लेकिन आज भी अगर हर हिन्दुस्तानी का मन टटोला जाए तो उस बात के निशान बिल्कुल ताज़ा ही मिलेंगे। एक लंबा...
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प्रशान्त कुमार (काव्यांश)
kargil war
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[26 Jul 2009 02:47 AM]



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