इतिहास की दृष्टि से वर्ण व्यवस्था -भाग १

सरयूपारीण ब्राह्मण क्षत्रिय विशाम् शूद्राणां च परन्तप।कर्माणि प्रविभक्तानि स्वभावप्रभवैर्गुणै:॥ (गीता १८/४१)अर्थात् ब्राह्मण, क्षत्रिय वैश्य और शूद्र कर्म स्वभाव से हीउत्पन्न गुणों के आधार पर ही विभाजित किए गए हैं।अरविन्द शर्मा की "क्लास्सिकल हिंदू थोअट" में वर्ण... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)

५.वर्ण व्यवस्था

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[09 Aug 2009 00:36 AM]

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