इतिहास की दृष्टि से वर्ण व्यवस्था -भाग २

सरयूपारीण न वर्णा न वर्णाश्रमाचारधर्मा न मे धारणाध्यानयोगादयोपि।अनात्माश्रयाहंममाध्यासहानात्‌ तदेकोऽवशिष्ट: शिवः केवलोऽहम्‌॥जगतगुरु आदि शंकराचार्य द्वारा रचित "दशाश्लोकी" के यह श्लोक७वी शताब्दी में वर्ण-व्यवस्था की धार्मिक मीमांसा और दर्शन में नगण्यता को दिखता है।... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)

५.वर्ण व्यवस्था

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[09 Aug 2009 00:36 AM]

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