फरीद के श्लोक - ४०
किआ हंसु किआ बगुला, जा कउ नदरि धरे॥जे तिसु भावै नानका, कागहु हंसु करे॥१२४॥सरवर पंखी हेकड़ो,फाहीवाल पचास॥ऐहु तनु लहरी गडु थिआ, सचे तेरी आस॥१२५॥कवणु सु अखरु,कवणु गुणु,जिहबा मणीआ मंतु॥कवणु सु वेसो हऊ करी,जितु वसि आवै कंतु॥१२६॥उपरोक्त श्लोक गुरु नानक देव जी...
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परमजीत बाली
परमजीत बाली
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[27 Jul 2009 15:09 PM]



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