जिंदगी और रंग

Meri Kavitayein दिल दिमाग के दरम्यान,सिमट आती है जिंदगी,जब अपनी सोच के जालों में,उलझ सी जाती है जिंदगी।मन की सतहों पर,गुजरे पलों के स्केच से बनते हैं,धीरे -धीरे उनमें फिर,यादों के रंग भरते हैं,अलग-अलग अनोखे रंग,कुछ चटकीले, कुछ फीके रंग,कुछ नए रिश्तों से हल्के... [पूरी पोस्ट]
writer Navnit Nirav
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[07 Sep 2009 13:42 PM]

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