जिंदगी और रंग
दिल दिमाग के दरम्यान,सिमट आती है जिंदगी,जब अपनी सोच के जालों में,उलझ सी जाती है जिंदगी।मन की सतहों पर,गुजरे पलों के स्केच से बनते हैं,धीरे -धीरे उनमें फिर,यादों के रंग भरते हैं,अलग-अलग अनोखे रंग,कुछ चटकीले, कुछ फीके रंग,कुछ नए रिश्तों से हल्के...
[पूरी पोस्ट]
Navnit Nirav
14
0
0
0
0
[07 Sep 2009 13:42 PM]



Shuffle








