गाँव की याद

Meri Kavitayein तन झुलसाती गर्मी बीती,और ये पावस बीत गया,यहाँ अजब सी हवा चली,एक क्षण मैं कुछ सोच न पाया ,कल तक जिन गलियों में खेला,उनको कैसे मैं भूल गया,साथ छूटने का गम है मुझको,पर उसने भी न मुझे बताया,भूल चला था मैं तुझको भी,मेरे गाँव, आज मुझे तू याद आया।तुझ संग कभी... [पूरी पोस्ट]
writer Navnit Nirav
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[22 Sep 2009 20:43 PM]

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