रंजो गम मुफलिसी की गज़ल जिंदगी
- राजेश त्रिपाठीरंजो गम मुफलिसी की गज़ल जिंदगी।कैसे कह दें खुदा का फज़ल जिंदगी।। भूख की आग में तपता बचपन जहां है। नशे में गयी डूब जिसकी जवानी ।। फुटपाथ पर लोग करते बसर हैं। राज रावण का सीता की आंखों में पानी।।किस कदर हो भला फिर बसर जिंदगी।कैसे कह...
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Rajesh Tripathi
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[02 Aug 2009 14:06 PM]



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