गांव मर रहे हैं, इन्हें बचाइए!
-राजेश त्रिपाठी गांव इन दो शब्दों में ऐसी मिठास और आत्मीयता भरी है कि इन दो अक्षरों में जैसे खुशियों का संसार समाया है। आप जितने भी बड़े हो गये हों, देश में हों या विदेश में, छोटे कस्बे में हों या किसी महानगर में, अगर आपका जन्म गांव का है तो आपकी स्मृति...
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Rajesh Tripathi
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[05 Aug 2009 06:12 AM]



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