मां
-राजेश त्रिपाठीममता की छांव सीबेघर के ठांव सीजाड़े में धूप सीयानी अनूप सीमांगंगा की धार सीबाढ़ में कगार सीठंड़ी बयार सीनफरत में प्यास सीमांधूप में साया सीमोहमयी माया सीगहराई में सागर सीप्यार भरी गागर सीमांदुर्दिन अपार में निर्दयी संसार मेंकष्टों की मार...
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Rajesh Tripathi
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[23 Sep 2009 09:41 AM]



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