अपना घर, अपना शहर याद आता है

संध्या मम्मी की रोटी का समोसा, पापा का दो रुपया। अनमने से सुबह उठना, नाक-भौं चढ़ाना। मम्मी का चिल्लाना, पापा का बचाना, बहुत याद आता है, सब कुछ बहुत याद आता है। तैयार होकर साइकिल उठाना, मेरा नखरे दिखाना, मम्मी का मनाना, पेटीज और फ्रूटी की रिश्वत पर एक रोटी खाना।... [पूरी पोस्ट]
writer संध्या
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[25 Aug 2009 07:46 AM]

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