बिन नाम सब सून : राजेश उत्साही

गुल्लक शेक्सपीयर ने कहा था कि ‘नाम में क्या रखा है।’ सवाल वास्तव में यही है कि आपने उसमें रखा क्या है। अगर कुछ नहीं रखा है तो कुछ नहीं दिखेगा। सच तो यह कि हम हर किसी को नाम से ही तो याद करते हैं। आजकल तो नाम का ही दाम है। मैं नई जगह, नए लोगों के बीच आया हूं। हर... [पूरी पोस्ट]
writer राजेश उत्‍साही

भारतीय

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[19 Aug 2009 00:43 AM]

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