नाटक भगत सिंह - अन्तिम भाग
द्रश्य ३:सारे एक के बाद एक आते हैं...>आ : मित्रों अब हमें आगे की योजना बनानी है...सु : (विवश होकर) हमने समझा था की फिरंगी ऑफिसर के वध से फिरंगियों को सबक मिलेगा, उन्हें हिन्दुस्तानी जीवन की कीमत का आभास होगा।दा : वो हमारी कोई कीमत नहीं करते हैं॥ कीडे...
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Jayant Chaudhary
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[11 Aug 2009 00:38 AM]



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