यौवन शरणम गच्छामि

ज़रा हट के-लाफ्टर के फटके   "सूरज की गरमी से जलते हुए तन को मिल जाए तरुवर की छाया... ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है जब से मैँ शरण तेरी आया... मेरे राम"... ओफ्फो!...उम्र के इस पड़ाव पे मैँ ये क्या अंट-शंट बकने लगा?... अब तो ज़माना बदल गया है क्योंकि ... "रंग नया... [पूरी पोस्ट]
writer राजीव तनेजा

rajivtaneja

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[31 Dec 2009 01:06 AM]

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