ये जो मन की सीमा रेखा है ...
ये क्यूबिकल भी कितने खुले होते हैं न .... भावनाओं जैसे ...कहाँ से कौन सी बात अनचाहे ही कानों में पड़ जाए, पता ही नहीं चलता | यूं तो सबको क्यूब एटिकेट खूब सिखाया जाता है - दूसरों की बात नहीं सुनते, दूसरों की मेल नहीं पढ़ते |पर हम भी तो इंसान हैं .. कैसे बच...
[पूरी पोस्ट]
kavitaprayas
कहानी
17
0
0
0
0
[11 Aug 2009 21:38 PM]



Shuffle








