ये जो मन की सीमा रेखा है ...

ek kahani - aav, bhaav aur prabhaav ki ! ये क्यूबिकल भी कितने खुले होते हैं न .... भावनाओं जैसे ...कहाँ से कौन सी बात अनचाहे ही कानों में पड़ जाए, पता ही नहीं चलता | यूं तो सबको क्यूब एटिकेट खूब सिखाया जाता है - दूसरों की बात नहीं सुनते, दूसरों की मेल नहीं पढ़ते |पर हम भी तो इंसान हैं .. कैसे बच... [पूरी पोस्ट]
writer kavitaprayas

कहानी

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[11 Aug 2009 21:38 PM]

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