गीत: शब्द वही हैं ....

my favorite contemporary poets आनंदकृष्ण, जबलपुर शब्द वही हैं, बदल गई है केवल अर्थों की भाषा । छले हुए स्वप्नों में खोई सूनी आंखों की आशा । हवा चूमती थी पागल सी रेतीले नदिया तट को, जाने किसने झटका था चंदा की आवारा लट को । झूम-झूम नर्तन करते थे, नीलगिरि के उंचे पेड़- बगिया मुस्काई थी... [पूरी पोस्ट]
writer kavitaprayas

आनंदकृष्ण

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[28 Jul 2009 16:52 PM]

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