रिपोर्ताज ‘रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून’
मानव के आदिम इतिहास में महाद्वीपों के इस छोर से उस छोर को नंगे पैरों से नापने वाले कितने काफिलों, कितने लश्करों अपने डेरे पानी से लबालब नदियों किनारे डाले तो फिर हिले नहीं । दुनिया की महान सभ्यतायें इन नदियों के पानी में स्नान कर या वजू कर खुद को धन्य...
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Rajen Todariya
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[21 Sep 2009 04:33 AM]



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