रुलाकर मुझको वो भी तो रोया होगा
रुलाकर मुझको वो भी तो रोया होगा जगाकर मुझको वो भी न सोया होगा चलो उसे हमदर्दी की धूप मे सुखा ले जो तकिया उसने आसुवों से भिगोया होगा कवि: रोहित कुमार "मीत" जी की रचना रचना के बारे में अपनी मह्तबपूर्ण राय बताये ताकि अगली रचना और भी बहतर हो...
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gargi gupta
रोहित कुमार "मीत"
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[01 Sep 2009 02:42 AM]



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