पूछता रहता है क्या

अभिव्यक्ति ये परिंदा इन दरख्तों से, पूछता रहता है क्या,ये आसमां की सरहदों में, ढूंढता रहता है क्या.जो कभी खोया नहीं, उसको तलाश करना क्या,इन दरों को पत्थरों को, चूमता रहता है क्या.खोलकर तू देख आँखें, ले रंग ख़ुशी के तू खिला,गम को मुक़द्दर जान के, यूँ ऊंघता रहता है... [पूरी पोस्ट]
writer gargi gupta

दीपक "मशाल"

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[01 Sep 2009 02:37 AM]

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