आपको मेरा नमन है.....!!!
यह कविता में अपने गुरुओ के लिये लिख रही हूँ , आज में जो कुछ भी हूँ बस उनकी ही कॄपा है। ईश्वर से प्रार्थना है की उनका हाथ सदा मेरे सर पर रहे।मैं थी शिशुअज्ञान - अबोध - अचेतनसभी से अन्भिज्ञा थी मैंउसने अपनों से परिचित करायाजीवन की पाठशाला काउसी से पहला पाठ...
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gargi gupta
कविता
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[05 Sep 2009 07:30 AM]



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