मेरी बेबसी देखिये
बना डाला खुदा उफ़ ये बंदगी देखियेअकीदते-बाज़ार मे खडा आदमी देखियेसमंदर भी लगने लगा है दरिया मुझेभड़की है एक कदर तिशनगी देखियेहर बार आईने मे शक्ल नयी सी दिखेकितने हिस्से मे बट गयी जिंदगी देखियेरो देते है तन्हाई मे खुद से बाते कर"मीत"गर मिले फ़ुर्सत तो मेरी...
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gargi gupta
रोहित कुमार "मीत"
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[07 Sep 2009 02:56 AM]



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