मैं तेरे साथ - साथ हूँ।।

अभिव्यक्ति देखो तो एक सवाल हूँ । समझो तो , मैं ही जवाब हूँ ।। उलझी हुई,इस ज़िन्दगी में। सुलझा हुआ-सा तार हूँ।। बैठे है दूर तुमसे , गम न करो । मैं ही तो बस, तेरे पास हूँ।। जज्वात के समन्दर में दुबे है। पर मैं ही , उगता हुआ आफ़ताब हूँ रोशनी से भर गया सारा समा । पर... [पूरी पोस्ट]
writer gargi gupta

कविता

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[09 Sep 2009 04:00 AM]

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