फिर कई मासूम बचपन, पल में जवां हो जायेंगे
लो यहाँ इक बार फिर, बादल कोई बरसा नहीं,तपती जमीं का दिल यहाँ, इसबार भी हरषा नहीं .उड़ते हुए बादल के टुकड़े, से मैंने पूछा यही,क्या हुआ क्यों फिर से तू, इस हाल पे पिघला नहीं.तेरी वजह से फिर कई, फांसी गले लगायेंगे, अनाथ बच्चे भूख से, फिर पेट को दबायेंगे.माँ...
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gargi gupta
दीपक "मशाल"
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[12 Sep 2009 06:04 AM]



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