माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।
"इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती हैमाँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।अभी ज़िंदा है माँ मेरी, मुझे कुछ भी नहीं होगामैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती हैजब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती हैमाँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती हैऐ अंधेरे देख ले...
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Umesh Pathak / उमेश पाठक
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[09 Oct 2009 13:47 PM]



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