मेरे यकीन का जब उसने इम्त्तिहान लिया...

apni baat!  Umesh Pathak ke saath. - उमेश पाठकमेरे यकीन का जब उसने इम्त्तिहान लिया॥जो सच नही था ,उसको भी उसने मान लिया !दिल को समझाने की कोशिश मेरी बेकार हुयी,मेरे दिल ने भी तो उसी का कहा मान लिया !बेवफाई-वफ़ा ,सभी है,पर यकीन के बाद ,आसमान भी तो मिल जाता है ,ज़मीन के बाद ,जिसमे बसती है ,... [पूरी पोस्ट]
writer Umesh Pathak / उमेश पाठक
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[16 Sep 2009 09:22 AM]

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