इसलिए वह
इसलिए वह देवताओं की तरह इतरा गया जो मिला उसके चरण तक झुक गया झुकता गया सूर्य उसके अहम् का छूने लगा ऊंचाइयां दीप मेरी आस्था का मंद हो बुझाता गयाकारवां तो चल रहा था ठीक थी उसकी दिशा रहनुमा को क्या हुआ जो खुद उसे भटका गयामैं निवेदन कर रहा था राह की मुश्किल...
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jogeshwar garg
ghazal
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[12 Oct 2009 09:18 AM]



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