आए अब तक सावन कितने
आए अब तक सावन कितनेसूखे फ़िर भी मधुबन कितने घर है कितने बिखरे बिखरेकटते बंटते आँगन कितने जाति क्षेत्र भाषाएँ मज़हबकर डाले सीमांकन कितने करी किसीने घोर तपस्याडोल उठे सिंहासन कितने चेहरे पर यदि मैल जमा होफ़िर हो उजले दर्पन कितने वर्षों से लिपटे हैं...
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jogeshwar garg
ghazal
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[19 Dec 2009 03:14 AM]



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