ब्लागर्स पार्क में रिसते रिश्ते
वो डरते हैं कि रिश्तों के रिसाव से जुडा सच, उनकी निजता को भंग कर देगा |वो डरते हैं अपनी पहचान बताने में !उन्हें डर हैं अभिव्यक्ति पर रिश्तों के गहराते असर से !उन्हें लगता है सच के सामने आने से उनकी बेबाकी ,बेईमानी में तब्दील होकर सबके सामने आ जायेगी...
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आवेश
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[06 Aug 2009 21:52 PM]



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