"अकेला चला था..."

अकेला चला थायूँ तनहा चला था मंजिल को आखिरवो पाने चला था,आँखों में सपने दिल में उमंगेंलेकर वो राही चलता चला था,चालों में मस्तीकदमों में थिरकनमतवाला आखिर वो बढ़ता चला था,मैंने न देखातुने न देखालेकिन चला चलचलता चला था,मंजिल को आख़िर वो पाने चला था,अकेला चला... [पूरी पोस्ट]
writer सत्य प्रिय

'सत्य प्रिय सिंह'

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[30 Jul 2009 03:33 AM]

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