"शबनम की बूँदें..."
सपना था यूँ पलकों परजैसे शबनम की बूँदेहुआ सबेरा तो भ्रम टूटाजैसे शबनम की बूँदेदिन की घोर तपिश में पिघलेजैसे शबनम की बूँदेआंखों से वो झर-झर जाए जैसे शबनम की बूँदेमन को वो व्याकुल कर जाए जैसे शबनम की बूँदेशाम को आख़िर मिली ताजगीजैसे हों शबनम की बूँदेंआख़िर...
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सत्य प्रिय
'सत्य प्रिय सिंह'
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[30 Jul 2009 03:34 AM]



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