फिर भी नया साल है !
थालियाँ छनक रही ,कटोरियाँ भड़क रहीं रोटी है न दाल है ,कमाल है ,कमाल है फिर भी नया साल है | भूख के सवाल पर ,हाल बेहाल पर सुर्ख रंग लाल है ,लाल लाल लाल है फिर भी नया साल है |हर तरफ बवाल है,बवाल पर बवाल हैजिससे जूझता हुआ हर आदमी हलाल हैफिर भी नया साल है...
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आवेश
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[31 Dec 2009 10:43 AM]



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