राजभाषा के राग
राजभाषा को देश अभी भी समझ रहा है। इस समझ में ऊभरे नए-नए विचारों की नई-नई बोलियॉ होती हैं पर सबसे मज़ेदार बात यह है कि इन बोलियों के भाव दशकों पुराने होते हैं। चूँकि राजभाषा हिन्दी को अभी भी हमारा देश समझने में की प्रक्रिया में है इसलिए इन रागों को अब भी...
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धीरेन्द्र सिंह
व्यंग
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[23 Aug 2009 02:02 AM]



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