राजभाषा के राग

Dhirendra Singh राजभाषा को देश अभी भी समझ रहा है। इस समझ में ऊभरे नए-नए विचारों की नई-नई बोलियॉ होती हैं पर सबसे मज़ेदार बात यह है कि इन बोलियों के भाव दशकों पुराने होते हैं। चूँकि राजभाषा हिन्दी को अभी भी हमारा देश समझने में की प्रक्रिया में है इसलिए इन रागों को अब भी... [पूरी पोस्ट]
writer धीरेन्द्र सिंह

व्यंग

views
10
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[23 Aug 2009 02:02 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix