हिंदी दिवस पर अभिलाषा
हिंदी दिवस भाषा का तपिश भरा दिन होता है। प्रतिवर्ष प्रशंसाओं और आलोचनाओं आदि से परिपूर्ण यह दिन शाम होते होते चर्चाओं, प्रतिक्रियाओं आदि से थक कर निढाल हो जाता है। या यूँ भी कहा जा सकता है कि दिवस चेतनाशून्य हो जाता है। यह विचार केवल कुछ हिंदी दिवस की...
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धीरेन्द्र सिंह
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[12 Sep 2009 00:14 AM]



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