एक आंसू गिरा उसकी आंख से....

खुली खिड़की वो ही रेलवे स्टेशन, वो ही रेलगाड़ी, पर कुछ बदलाव था इस बार। फर्क इतना था कि कभी इस गाड़ी से मैं आया था, और आज इस गाड़ी से कोई जा रहा था। जैसे परिंदे दाने चुगने के बाद अपने घरों की तरफ चल देते हैं, वैसे ही एक परिंदा आज यहां से उड़कर अपने घर जाने को तैयार था,... [पूरी पोस्ट]
writer Kulwant Happy

friend

views
12
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[31 Jul 2009 03:43 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix